क्या होता है ‘ऑब्सट्रक्टिंग द फील्ड’?
क्रिकेट के नियमों (Law 37) के मुताबिक, अगर कोई बल्लेबाज जानबूझकर फील्डिंग टीम के काम में बाधा डालता है, वो थ्रो रोकना हो, कैच में दखल देना हो या रन-आउट से बचने के लिए रास्ता बदलना, तो उसे ऑब्सट्रक्टिंग द फील्ड के तहत आउट दिया जा सकता है। इस नियम में सबसे जरूरी शब्द है- जानबूझकर या इंटेंट या फिर इरादा। यही पूरे नियम का दिल है।
कब बल्लेबाज आउट दिया जाता है?
1. फील्डिंग में जानबूझकर बाधा डालना
अगर बल्लेबाज थ्रो की लाइन में आ जाए या शरीर या हाथ से गेंद रोक दे या फिर फील्डर को भ्रमित करे और यह सब जानबूझकर हो, तो उसे आउट दिया जाता है।
2. रन लेते समय दिशा बदलना
अगर बल्लेबाज रन लेते वक्त अचानक अपनी लाइन बदलता है और इससे फील्डर का रन-आउट प्रयास रुक जाता है, तो अंपायर उसे आउट दे सकता है, चाहे रन-आउट होता या नहीं, यह मायने नहीं रखता।
3. हाथ से गेंद मारना (बैट के अलावा)
अगर स्ट्राइकर गेंद को हाथ से मारता है (बैट के अलावा) और यह जानबूझकर है, तो उसे आउट करार दिया जाएगा।
4. कैच रोकने की कोशिश करना
अगर बल्लेबाज जानबूझकर ऐसा कुछ करता है जिससे उसका कैच नहीं पकड़ा जा सके, तो उसे आउट करार दिया जाएगा।
कब नॉट आउट दिया जाता है?
1. अगर सब कुछ गलती से हुआ हो
अगर बल्लेबाज का कोई इरादा नहीं था तो उसे नॉट आउट करार दिया जाएगा। हालांकि, ये फैसला और चेक अंपायर को करना होता है।
2. खुद को चोट से बचाने के लिए
अगर बल्लेबाज गेंद से बचने के लिए मूव करता है तो उसे नॉट आउट दिया जाएगा।
3. विकेट बचाने के लिए दूसरी बार गेंद मारना
अगर बल्लेबाज अपनी विकेट बचाने के लिए गेंद को दोबारा मारता है (नियम के तहत), तो उसे नॉटआउट करार दिया जाएगा।
यानी पूरा खेल इंटेंट यानी इरादे का है। आउट या नॉट आउट का फैसला पूरी तरह से उसी पर निर्भर है। जानबूझकर किया तो आउट, गलती से हुआ तो नॉट आउट, लेकिन सब चेक अंपायर को करना होता है। इंटेंट अंपायर ही चेक करता है। यही इरादा इस नियम का सबसे बड़ा और विवादित हिस्सा है। अब जानते हैं कि इस नियम के शिकार आईपीएल में कितने खिलाड़ी हुए…





