अपने बेबाक और अक्सर विवादित बयानों के लिए चर्चा में रहने वाले पूर्णिया सांसद पप्पू यादव अब चौतरफा मुश्किलों में घिरते नजर आ रहे हैं। बिहार राज्य महिला आयोग ने सांसद पप्पू यादव को एक वायरल वीडियो के मामले में कारण बताओ नोटिस जारी किया है। आरोप है कि सांसद ने महिला आरक्षण और राजनीति में महिलाओं की भूमिका को लेकर बेहद आपत्तिजनक और अमर्यादित टिप्पणी की है। हाल ही में महिला आरक्षण बिल को लेकर केंद्र सरकार पर हमला बोलते हुए पप्पू यादव ने मर्यादा की सीमाएं लांघ दीं। उन्होंने एक बेहद विवादित बयान देते हुए कहा कि देश में महिलाओं की सुरक्षा पर ध्यान नहीं दिया जा रहा है और 90% महिलाओं का राजनीतिक करियर नेताओं के बेड (बिस्तर) से शुरू होता है।
सांसद ने आगे आरोप लगाया कि देश में यौन शोषण के मामलों में सफेदपोश नेताओं की बड़ी भूमिका है और कई मौजूदा सांसदों पर गंभीर आरोप लगे हैं। उनके इस बयान के बाद सोशल मीडिया पर उबाल आ गया और महिला संगठनों ने इसे समस्त नारी शक्ति का अपमान करार दिया है। इसी वायरल वीडियो का संज्ञान लेते हुए बिहार राज्य महिला आयोग ने सख्त रुख अपनाया है।
पप्पू यादव का गुस्सा केवल महिला आरक्षण तक सीमित नहीं रहा। उन्होंने असम के मुख्यमंत्री हिमंता बिस्व सरमा पर भी व्यक्तिगत और अमर्यादित हमला किया। उन्होंने हिमंता बिस्व सरमा की तुलना चिंपांजी और कुत्ते से करते हुए उन्हें चरित्रहीन और बाचाल तक कह डाला। सांसद ने तीखे लहजे में कहा कि वे मानव नहीं, बल्कि वनमानुष हैं। उन्होंने आगे कहा कि बड़े नेताओं के खिलाफ बोलने वालों की स्थिति सड़क पर भौंकते कुत्तों जैसी होती है, जबकि बड़े नेता हाथी की तरह अपने रास्ते पर चलते रहते हैं।
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महिला आरक्षण बिल के पक्ष में होने का दावा करते हुए पप्पू यादव ने केंद्र सरकार की मंशा पर गंभीर सवाल उठाए। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार ने बिना व्यापक चर्चा, विशेषज्ञों की राय और राज्यों से परामर्श के यह फैसला लिया है। 2014 और 2019 में पूर्ण बहुमत होने के बावजूद इस बिल को ठंडे बस्ते में रखा गया, लेकिन अब केवल राजनीतिक लाभ के लिए इसे पेश किया गया है। ओबीसी, ईबीसी, एससी-एसटी और अल्पसंख्यक समुदाय की महिलाओं को उचित हिस्सेदारी न देना एक बड़ी साजिश है, जिसके लिए जनता सरकार को कभी माफ नहीं करेगी।





