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Tuesday, April 21, 2026
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Politics:बंगाल की राजनीति में झालमुड़ी के बाद मछली का तड़का, Cm ममता बोलीं- पीएम मोदी के लिए खुद पकाऊंगी – After Jhalmuri Fish Tadka Bengal Politics Cm Mamata Says Will Cook It Myself For Pm Modi

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पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव का प्रचार अब खान-पान के दिलचस्प मोड़ पर पहुंच गया है। राज्य की मशहूर झालमुड़ी और मछली अब भाजपा और टीएमसी के बीच जुबानी जंग का हिस्सा बन गई हैं। मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने प्रधानमंत्री के झालमुड़ी खाने को नाटक बताया। वहीं, दूसरी तरफ भाजपा ने इसे छोटे व्यापारियों से जुड़ाव बताया है। खान-पान की इस बहस ने बंगाल के चुनावी माहौल को और भी गरमा दिया है। आरोप-प्रत्यारोप के बीच अब मछली और अंडे पर पाबंदी की चर्चा भी तेज हो गई है।

पीएम के झालमुड़ी खाने पर क्या बोलीं ममता?

रविवार को झारग्राम में चुनाव प्रचार के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सड़क किनारे एक साधारण दुकान से बंगाल का प्रसिद्ध नाश्ता ‘झालमुड़ी’ खाया था। इस पर तीखा प्रहार करते हुए मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने कहा कि यह सिर्फ एक दिखावा (शो) था। 

उन्होंने आरोप लगाया कि जो झालमुड़ी प्रधानमंत्री ने खाई, वह दुकानदार ने नहीं बनाई थी, बल्कि उसे एसपीजी (SPG) के जवानों ने तैयार किया होगा। ममता बनर्जी ने इसे चुनावी स्टंट बताते हुए कहा कि प्रधानमंत्री केवल वोट बटोरने के लिए जनता के बीच इस तरह का ‘ड्रामा’ कर रहे हैं।

ये भी पढ़ें- Kharge in Controversy: खरगे ने प्रधानमंत्री को पहले बता दिया ‘आतंकी’, बवाल हुआ तो सफाई में कहा- वो डराते हैं

खान-पान की पाबंदी पर भाजपा पर क्या आरोप?

टीएमसी ने भाजपा पर आरोप लगाया है कि यदि राज्य में भाजपा की सरकार आती है, तो मछली, मांस और अंडे खाने पर प्रतिबंध लगा दिया जाएगा। इन आरोपों को लेकर ममता बनर्जी ने मंगलवार को बड़ा बयान देते हुए कहा कि अगर प्रधानमंत्री मछली खाना चाहते हैं, तो मैं खुद उनके लिए मछली पकाऊंगी। 

इसके जवाब में भाजपा नेता और सांसद अनुराग ठाकुर ने कहा कि भाजपा खान-पान की आदतों पर कोई रोक नहीं लगाएगी। उन्होंने कहा कि बंगाल के मछली प्रेमी लोग अपनी पसंद का खाना खाने के लिए स्वतंत्र हैं और टीएमसी केवल जनता के बीच डर और भ्रम फैला रही है।

लक्ष्मी भंडार और मातृ शक्ति योजना में क्या फर्क?

ममता बनर्जी ने बैरकपुर में एक चुनावी रैली को संबोधित करते हुए महिलाओं के लिए अपनी ‘लक्ष्मी भंडार’ योजना का जिक्र किया। उन्होंने कहा कि उन्होंने महिलाओं को दी जाने वाली भत्ता राशि बढ़ाकर 1,500 रुपये करने का अपना वादा पूरा किया है। 

ममता ने सवाल उठाया कि अगर वह राज्य के बजट में ऐसा कर सकती हैं, तो प्रधानमंत्री ने देश की महिलाओं के लिए ऐसा क्यों नहीं किया। उन्होंने भाजपा द्वारा बंगाल की महिलाओं को ‘मातृ शक्ति’ योजना के तहत हर महीने 3,000 रुपये देने के वादे की आलोचना की और इसे चुनाव से पहले किया गया एक झूठा वादा करार दिया।

चुनाव आयोग पर बरसीं ममता बनर्जी

मुख्यमंत्री ने राज्य सरकार के कर्मचारियों के महंगाई भत्ते (DA) को लेकर भी महत्वपूर्ण दावा किया। उन्होंने कहा कि उनकी सरकार ने चुनाव तारीखों के एलान से ठीक पहले कर्मचारियों के लिए चार प्रतिशत डीए की घोषणा की थी। ममता बनर्जी ने आरोप लगाया कि अब चुनाव आयोग उन्हें इस डीए का भुगतान करने की अनुमति नहीं दे रहा।

उन्होंने भाजपा पर निशाना साधते हुए कहा कि वे केवल चुनाव के वक्त बड़े-बड़े वादे करते हैं, जबकि उनकी सरकार जमीन पर काम करके दिखाती है। इस बयान के बाद राज्य के सरकारी कर्मचारियों के बीच भी चुनावी सुगबुगाहट तेज हो गई है।

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