Advertisementspot_imgspot_img
26.1 C
Delhi
Monday, May 4, 2026
Advertismentspot_imgspot_img

‘मुझे लात मारी गई’:सीएम ममता बनर्जी का गंभीर आरोप, बोलीं-सीसीटीवी बंद कर एजेंटों को रोका – Mamata Banerjee Says Bjp Looted Seats In West Bengal Election Results Updates

Date:


पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के नतीजों में पिछड़ने के बाद मुख्यमंत्री और तृणमूल कांग्रेस की सुप्रीमो ममता बनर्जी ने आक्रामक रुख अपना लिया है। राज्य में टीएमसी की जमीन खिसकने के बाद उन्होंने भाजपा और चुनाव आयोग पर तीखा हमला बोला है। ममता बनर्जी ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि उनकी पार्टी इस हार से घबराने वाली नहीं है और वे जोरदार वापसी करेंगे।

सीएम ममता ने क्या-क्या कहा? 

ममता बनर्जी ने कहा, ‘भाजपा ने 100 से ज्यादा सीटें लूटी हैं। चुनाव आयोग अब भाजपा का कमीशन बन चुका है। मैंने इस संबंध में चुनाव अधिकारी और मनोज अग्रवाल से भी शिकायत की थी, लेकिन उन्होंने कोई कार्रवाई नहीं की।’ दीदी ने इस जीत की वैधता पर सवाल उठाते हुए इसे लोकतंत्र के खिलाफ बताया। ममता बनर्जी ने आगे कहा, ‘क्या आपको लगता है कि यह कोई जीत है? यह एक अनैतिक जीत है, नैतिक जीत नहीं है। चुनाव आयोग ने प्रधानमंत्री, गृह मंत्री और केंद्रीय बलों के साथ मिलकर जो कुछ भी किया है, वह पूरी तरह से अवैध है। यह सिर्फ लूट, लूट और लूट है। हम फिर से वापसी करेंगे।’ 

तीन बजे से हमें पीटा गया, मुझे लात मारी गई-ममता बनर्जी

पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री और टीएमसी अध्यक्ष ममता बनर्जी ने मतगणना के दौरान गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि दोपहर 3 बजे से उनके कार्यकर्ताओं को पीटा गया और उनके साथ बदसलूकी करते हुए उन्हें लात मारी गई। मुख्यमंत्री ने दावा किया कि मतगणना केंद्र के सीसीटीवी बंद कर दिए गए और उनके एजेंटों को अंदर प्रवेश नहीं करने दिया गया। ममता बनर्जी ने कहा, ‘मैं खुद पांच मिनट के लिए अंदर गई थी और एजेंट को अनुमति देने का अनुरोध किया था, जिस पर आश्वासन तो मिला लेकिन बाद में कोई अधिकारी उपलब्ध नहीं हुआ।’ 

यह भी पढ़ें: विजय पदार्पण के साथ ही सत्ता के करीब: 8 ग्राम सोना मुफ्त जैसे वादों से द्रविड़ किला फतह, मिलेगा कांटों भरा ताज

एंटी-इंकंबेंसी और ध्रुवीकरण की लहर

15 साल के लंबे शासन के बाद टीएमसी को राज्य में भारी सत्ता विरोधी लहर का सामना करना पड़ा। जमीन पर पार्टी के प्रति जनता में असंतोष, भ्रष्टाचार के आरोप और आर्थिक पिछड़ेपन जैसे मुद्दों ने मतदाताओं को विकल्प तलाशने पर मजबूर किया। इसके साथ ही, चुनाव में धार्मिक ध्रुवीकरण एक बड़ा कारक बनकर उभरा। भाजपा की ओर से लगाए गए तुष्टिकरण के आरोपों और हिंदू मतों के बड़े पैमाने पर एकीकरण ने टीएमसी के पारंपरिक वोट बैंक में बड़ी सेंध लगाई, जिससे पार्टी कई मजबूत गढ़ों में पिछड़ गई।

इतना ही नहीं, पार्टी के भीतर आंतरिक कलह और पुराने सहयोगियों का साथ छोड़ना टीएमसी के लिए भारी पड़ा। अभिषेक बनर्जी की ओर से दी गई आंतरिक चेतावनियों के बावजूद गुटबाजी और स्थानीय स्तर पर नेताओं के व्यवहार से जनता में नाराजगी बनी रही। वहीं, शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों के बीच बदलती प्राथमिकताओं और मतदाताओं की नई आकांक्षाओं को पढ़ने में विफलता ने टीएमसी की सीटों के आंकड़े को काफी नीचे धकेल दिया।

अन्य वीडियो-

 



Source link

Share post:

Advertisementspot_imgspot_img

Popular

More like this
Related

Advertisementspot_imgspot_img